लेखनी कहानी -21-Dec-2022
शिर्षक- नारी की परिभाषा
विधा-ललित लेख
मनुष्य जाती का वह वर्ग जो गर्भधारण कर मनुष्य को जन्म देता है उन्हें नारी कहते है। युवती तथा बालिंग स्त्री यो की सामुहिक संज्ञा को नारी कहते है । धार्मिक स्थानो में साधकों की परिभाषा मे प्रकृति और माया उन्हें नारी कहते है।
नारी के स्वभाव
नारी स्वभाव मे चंचल ,चतुर ,स्वाभिमानी होती है। नारी का लज्जा उनका आभूषण है तथा रोना उनका बल है । नारी के भोलापन और निशछलता के कारण वह सहज मुग्ध है । जाते है, प्रेम के अधीन हो जाती है। वह एक आंख से हंसती है तो दुसरी आंख से रोती है।
अनुरक्त रुप और विरक्त रुप
अनुरक्त रुप लेकर नारी अमृत तुल्य हो जाती है और विरक्त रुप लेने पर विष बन जाती है। वह उत्साहित भी जल्दी होती है तो उतने ही अधिक परिमाण मे निराशा बादिनी भी हो जाती है।
उपसंहार
नारी मानव की प्रिय है और संपूर्ण जगत की माता है । नारी प्रेरणा की अनुभूति को मधुर मातृत्व मे डालकर अपने प्राण न्यौछावर कर के जाती को जीवित रखती है । नारी ही मानवता की धुरी है।
- अभिलाषा देशपांडे
Haaya meer
27-Dec-2022 07:58 PM
Nice
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Sachin dev
22-Dec-2022 06:00 PM
Well done
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VIJAY POKHARNA "यस"
22-Dec-2022 07:13 AM
बहुत खूब
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